असम में इस बार मानसून के दौरान कुल मिलाकर सामान्य से लगभग 30% कम बारिश हुई, लेकिन फिर भी भारी बाढ़ आ गई। इसकी मुख्य वजह यह है कि बारिश पूरे सीजन में धीरे-धीरे होने के बजाय सिर्फ 2 दिनों (19–20 जुलाई) में बहुत ज्यादा हुई। बाढ़ क्यों आई?- बारिश एक साथ हुई
- पूरे सीजन में कम बारिश हुई।
- लेकिन 19–20 जुलाई को अत्यधिक वर्षा हुई, जिससे नदियाँ अचानक उफान पर आ गईं।
- नदियों का पानी तुरंत बढ़ गया
- धानसिरी और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर चली गईं।
- कई जगह 8 दिन से अधिक समय तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहा।
- असम की बाढ़ सिर्फ असम की बारिश पर निर्भर नहीं होती
- ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में पानी अरुणाचल प्रदेश और ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश से भी आता है।
- इसलिए असम में कम बारिश होने के बावजूद ऊपर के इलाकों की भारी बारिश से बाढ़ आ सकती है।
परिणाम- 75 लोगों की मौत
- 3.32 लाख लोग प्रभावित
- 45,000 हेक्टेयर से अधिक खेती डूब गई
- 32,000 से ज्यादा लोग राहत शिविरों में रहे
आसान भाषा में समझेंमान लीजिए आपको 100 लीटर पानी 30 दिनों में देना है। अगर वही पानी 2 दिनों में डाल दिया जाए, तो खेत या नाली उसे संभाल नहीं पाएंगे और पानी भर जाएगा। असम में भी यही हुआ—बारिश कम थी, लेकिन बहुत कम समय में बहुत ज्यादा हुई, इसलिए बाढ़ आ गई। निष्कर्ष: असम में बाढ़ का कारण कुल बारिश की मात्रा नहीं, बल्कि बारिश का बहुत कम समय में एक साथ होना और ऊपरी राज्यों (खासकर अरुणाचल प्रदेश) से नदियों में आया अतिरिक्त पानी था। |